Type Here to Get Search Results !

सुभाष स्मारक पब्लिक स्कूल पर गंभीर आरोप : छात्र से मारपीट, टी.सी. देने से किया इंकार – अभिभावकों से जबरन हलफनामा लेने का मामला...


 

सुभाष स्मारक पब्लिक स्कूल पर गंभीर आरोप : छात्र से मारपीट, टी.सी. देने से किया इंकार – अभिभावकों से जबरन हलफनामा लेने का मामला



कानपुर। शहर के साकेत नगर स्थित सुभाष स्मारक पब्लिक स्कूल पर गंभीर आरोप लगे हैं। कक्षा 8 में पढ़ने वाले छात्र की माँ ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


अभिभावक का आरोप है कि विद्यालय के शिक्षक दीपक और शिक्षिका अनुप्रिया ने उनके पुत्र के साथ कई बार बिना कारण मारपीट और दुर्व्यवहार किया। जब इस बारे में विद्यालय की प्रिंसिपल से शिकायत की गई तो उन्होंने खेद तो जताया लेकिन उसके बाद भी उत्पीड़न जारी रहा। छात्र ने यह भी बताया कि स्कूल में मारपीट आम बात है और शिक्षकों का कहना है कि "इस स्कूल में कॉलोनियों के बच्चे पढ़ते हैं, इन्हें समझाने के लिए मारपीट ही तरीका है।"


असहनीय स्थिति के चलते जब अभिभावक ने अपने पुत्र का एडमिशन अन्य विद्यालय में कराने के लिए ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टी.सी.) मांगा तो विद्यालय प्रशासन ने देने से साफ इनकार कर दिया। क्लर्क संदीप ने पहले तीन दिन में टी.सी. देने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में मना कर दिया। इतना ही नहीं, छात्र की बहन के साथ भी शिक्षक ने अपमानजनक व्यवहार किया और धमकी दी कि “कोई टी.सी. नहीं मिलेगी, जहां शिकायत करनी है कर लो।”


अभिभावक की शिकायत पर जब मामला जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा तो एसीएम-6 आलोक गुप्ता ने विद्यालय प्रबंधन से संपर्क किया। उस समय प्रिंसिपल ने टी.सी. न देने से इंकार किया और कहा कि उन्हें आवेदन ही नहीं मिला है, जबकि टी.सी. फार्म पहले ही जमा हो चुका था। बाद में डीआईओएस कार्यालय की दखल के बाद स्कूल मालिक सौरभ भट्ट ने अभिभावक से 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर जबरन हलफनामा लिखवाया कि “वे निजी कारणों से बच्चा निकाल रहे हैं और आगे कभी इस स्कूल में एडमिशन नहीं कराएंगे।” इसके बाद ही टी.सी. उपलब्ध कराया गया।


अभिभावक का कहना है कि उनके पास दूसरे विद्यालय में प्रवेश के लिए सिर्फ दो दिन बचे थे, इसलिए मजबूरन यह हलफनामा देना पड़ा। उन्होंने पूरे मामले को सार्वजनिक कर अन्य अभिभावकों को आगाह करने का आग्रह किया है कि विद्यालय में बच्चों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता है और प्रशासन कैसे मनमानी करता है।


👉 अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर बच्चों और अभिभावकों की आवाज यूं ही दबाई जाती रहेगी?

 न्यूज़ इंडिया नेटवर्क

 न्यूज़ एजेंसी

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Advertisement

Advertisement
न्यूज़ इंडिया नेटवर्क के साथ जुड़े...