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चिंतामणि गणपती थेयूर: चिंता मुक्ति का जागृत अष्टविनायक मंदिर | पुणे



 श्री चिंतामणि गणपती मंदिर – थेयूर: पुणे का पवित्र अष्टविनायक देवस्थान.....


अगर आपके जीवन में चिंताएँ लगातार बनी रहती हैं, मन बेचैन है या खुशियों की तलाश जारी है, तो आपको एक बार अवश्य थेयूर जाकर श्री चिंतामणि गणपती के दर्शन करने चाहिए। यह स्थान पुणे जिले में तीन नदियों — भीमा, मुला और मुथा — के संगम पर स्थित है और अष्टविनायक मंदिरों में पाँचवाँ स्थान रखता है।पौराणिक महत्व और कथाकहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने अपने विचलित मन को शांत करने के लिए यहीं पर गहन तपस्या की थी। यह वही स्थान है जहाँ उन्होंने ऋषि कपिल के लिए चिंतामणी रत्न प्राप्त किया।

मंदिर की गणेश प्रतिमा स्वयंभू (स्वयं प्रकट) मानी जाती है और इसकी विशेषता है कि गणेशजी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई है। मंदिर कदम्ब वृक्ष से भी जुड़ा है, और इसी वृक्ष के नीचे भगवान गणेश ने राजा अभिजीत के पुत्र गणराजा से युद्ध किया था।कथा के अनुसार, राजा अभिजीत और रानी गुनावती ने पुत्र प्राप्ति के लिए वर्षों तक तपस्या की थी। उन्हें पुत्र गणराजा हुआ — जो वीर तो था, परंतु गुस्सैल भी। एक दिन शिकार के दौरान वह ऋषि कपिल के आश्रम पहुंचा, जहाँ इंद्रदेव द्वारा दी गई चिंतामणि रत्न देख उसकी लोभवृत्ति बढ़ी और उसने बलपूर्वक रत्न छीन लिया।

ऋषि कपिल ने दुर्गा माता के कहने पर भगवान गणेश की आराधना की, और फिर गणेशजी ने गणराजा से युद्ध कर रत्न वापस लाकर कपिल ऋषि को सौंप दिया। इसी घटना के कारण यह क्षेत्र कदंब तीर्थ कहलाया।मंदिर की वास्तु और विशेषताएँमंदिर का मुख्य द्वार उत्तर दिशा की ओर है जबकि गणेशजी की प्रतिमा पूर्वमुखी है।मंदिर का सभा मंडप लकड़ी से बना है और इसके भीतर काले पत्थर का छोटा फव्वारा है।परिसर में पेशवा वाडा नामक इमारत है, जहाँ कभी पेशवा माधवराव निवास करते थे।एक विशेष ध्यान कक्ष भी यहाँ बना हुआ है, जहाँ भक्तगण शांति से ध्यान लगाते हैं।गणेश प्रतिमा की आंखों में जड़े बहुमूल्य रत्न इसे अद्भुत दिव्यता प्रदान करते हैं।दर्शन एवं यात्रा मार्गयह मंदिर पुणे शहर से लगभग 22 किमी तथा मूरेश्वर अष्टविनायक मुरगांव से लगभग 60 किमी दूरी पर स्थित है।

अगर आप दक्षिण भारत की यात्रा के दौरान कर्नाटक, महाराष्ट्र या मध्य प्रदेश के रास्ते आ रहे हों, तो इस जागृत देवस्थान — श्री चिंतामणि गणपती थेयूर — के दर्शन अवश्य करें। भक्त मानते हैं कि यहाँ की पूजा से जीवन की सारी चिंताएँ समाप्त होकर मन को स्थिरता और आनंद प्राप्त होता है।


लेखक: न्यूज़ इंडिया नेटवर्क टीम

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